Friday, 9 November 2012

भारतीय समाज

लन्दन में डॉक्टर्स की एक मीटिंग डाइट पार्क में आयोजित की गयी, जिसमे एक भारतीय डॉक्टर भी शामिल हुए, वहाँ एक प्रेमी जोड़ा अपनी दुनिया में मग्न था। डॉक्टर साहब का ध्यान बार बार उस ओर जाता था की कैसे बेशर्म हैं? जब वो उन्हें बार बार देखने लगे तो एक डच डॉक्टर ने उन्हें समझाया की आपकी इस हरकत से आप ही चरित्रहीन कहलायेंगे। वास्तव में हमने भारत में इसी तरह के समाज की रचना की है जहाँ हम दूसरे की निजता का न ख्याल रखते हैं न किसी का सुख हमसे देखा जाता। प्रेम को कोई स्वीकार्यता नहीं। और सबसे बढ़कर खुद न कर पाने का सबसे ज्यादा अफ़सोस और इर्ष्या। ऐसे समाज की में कड़े शब्दों में भर्त्सना करता हूँ .